Monday, February 2, 2009

वो पल एक पल के लिए आया ....












जिस एक पल के लिए, कबसे हम पलकें बिछाये बैठे थे,

वो पल एक पल के लिए आया, और बस चला गया,

जिस एक पल के लिए
जाने क्या क्या खाब सजाये बैठे थे,
वो पल एक पल के लिए आया, और बस चला गया,

हो गए अरमान पूरे और कुछ बाकी भी रह गए,
ख़ुशी गम सबकुछ वो लाया और बस चला गया,

अब अगले पल का इंतजार है, जो रंग नए लाएगा,
उस गुजरे पल की तरह ,
जो कई रंगों में रंगा आया, और बस चला गया ...

4 comments:

  1. पलों का इंतज़ार मत कीजे ,
    उनकी मजबूरियां हैं आने की ,
    क्यूँ वो बैठें बिछाए पलकों को ,
    जिनकी फितरत है मुस्कुराने की .

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  2. har pal bas intjaar hi rahta he..
    bahut sundar rachna he..
    kam shabdo me badi soch he..

    kabhi mere blog par bhi aane kaa kasht kariye..aapki tippaniyo se taaki mujhe kuchh sikhne ko mile

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  3. aapaki kaamana poori ho bahut sunder racnaa hai

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  4. PICHHALI RACHNAON KI TARAH.. YAH BHI BAHUT KHUBSURATA HAI...
    IS CONSISTENCY KO BANAYE RAKHE.....

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