Friday, January 23, 2009

आजाद हिंदोस्ता...

इक सुन्दर से गुलिस्तां की कल्पना की है,
मैंने इक स्वर्ग से जहां की कल्पना की है,
जहां हर शय से प्यार बरसेगा,
उस आजाद हिंदोस्ता की कल्पना की है !!

14 comments:

  1. bahut sunadar likhti he aap
    chaar line likhna hamesha se hi kathin vidha rahti he..aap me kabilyat he likha kare..

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  2. आपका ब्लॉग देखा बहुत अच्छा लगा.... मेरी कामना है की आपके शब्दों को नई ऊर्जा, नई शक्ति और व्यापक अर्थ मिलें जिससे वे जन-साधारण के सरोकारों का सार्थक प्रतिबिम्बन कर सकें.

    कभी समय निकाल कर मेरे ब्लॉग पर पधारें-
    http://www.hindi-nikash.blogspot.com

    सादर-
    आनंदकृष्ण, जबलपुर.

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  3. आप हिन्दी में लिखते हैं. अच्छा लगता है. मेरी शुभकामनाऐं आपके साथ हैं !
    नफरत की तो गिन लेते है रूपया आना पाई लोग,
    ढाई आखर कहने वाले मिले न हमको ढाई लोग....!
    हमारे ब्लॉग पर सदर आमंत्रित है ...

    कृष्णा

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  4. कभी किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता.......कभी जमीं तो कभी आसमां नहीं मिलता..........ये पंक्तियाँ तो आपने सुनी ही होंगी ना.........वैसे निराश तो मैं भी नहीं.. मगर इतना भी खुशफहम नहीं कि..............हाँ रचना तो अच्छी है........

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  5. Priyanka ji,
    Maine apkee pichhalee posten bhee padheen.Bahut kam shbdon men apne bahut kuchh kah dala hai.age bhee aisa hee likhiyega...is shubhkamna ke sath.
    Poonam

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  6. बहन प्रियंका
    आपका ब्लॉग अच्छा लगा

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  7. बहुत सुंदर...आपके इस सुंदर से चिटठे के साथ आपका ब्‍लाग जगत में स्‍वागत है.....आशा है , आप अपनी प्रतिभा से हिन्‍दी चिटठा जगत को समृद्ध करने और हिन्‍दी पाठको को ज्ञान बांटने के साथ साथ खुद भी सफलता प्राप्‍त करेंगे .....हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।

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  8. Acchi shuruaat, magar thora blog ke contrast par bhi dhyan dein. Swagat.

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  9. बहुत अच्छी कल्पना की थी आपने, काश आपकी कल्पना एक दिन सच हो जाये।

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  10. badhai ho..
    kabhi yaha bhi aaye..
    http://jabhi.blogspot.com

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  11. Mere blog pe aapka message mila. Thanx.
    priyanka ji, sirf 120 km door hai aap mumbai se lekin aapkee kavitaayen door le jaatee hai, sochne ko majboor kartee hain.
    AAl the best boss!
    www.abhayaism.blogspot.com

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  12. bahut sundar.
    ज़िन्दगी दे वजह न दे हमको, मुस्कुराना हमारी फितरत है... रासतो से नहीं हम मंजिलों से डरते हैं, चलते जाना हमारी फितरत है ...
    aapki profile ka yah sher bahut hi achchha laga.

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  13. nice post keep it up ....keep rocking...hey why dont u come at my blog ...its nice plz welcome...


    Jai Ho Magalmay Ho

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  14. रसात्मक और सुंदर अभिव्यक्ति

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